
धूरा–मंगोली क्षेत्र में गुलदार आतंक के बीच डीएम ने थामा मोर्चा — आधी रात तक पैदल ट्रैकिंग, जाँच और सुरक्षा व्यवस्था का नेतृत्व।
लोगों ने आज तक कई डीएम देखें लेकिन ऐसा डीएम नहीं देखा जिसे अपनी नहीं बल्कि जनता की इतनी फिक्र रहीं।
मंगोली गांव की धूरा पहाड़ी पर कड़ाके की सर्द रात थी। तापमान 4 डिग्री तक गिर चुका था। दिन ढलते ही जहां सूर्य 2 बजे बाद ही गायब हो जाता है, वहीं धूरा, मंगोली, ठांटा, सुदर्का, मानाढुंगा समेत एक दर्जन गांवों में कर्फ्यू जैसे हालात बने हुए थे। लोग घरों में कैद, बाहर मौत का सन्नाटा और इलाके में घूम रहे नरभक्षी गुलदारों का आतंक।
वन विभाग द्वारा घटना के बाद कैमरा ट्रैप, पिंजरे और पेट्रोलिंग की व्यवस्था तो की गई, एक गुलदार पकड़ा भी गया, लेकिन ग्रामीणों को अभी भी भरोसा नहीं—क्या यही वही नरभक्षी है? गांव वालों के अनुसार दो गुलदार पहले से क्षेत्र में सक्रिय थे।
इन्हीं भयभीत हालातों के बीच जिलाधिकारी मनीष कुमार ने वह किया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। मानव जीवन को छः लाख के मुआवजा राशि से भी ऊपर मानने वाले जिलाधिकारी मनीष कुमार देर रात खुद टीम लेकर धूरा क्षेत्र पहुंच गए। ठंड इतनी तीखी कि पाला कपड़ों पर जम रहा था, लेकिन डीएम ने बिना किसी भय के कैमरा ट्रैप की लोकेशन चेक की, पिंजरों का निरीक्षण किया, ट्रैकिंग पॉइंट्स देखे, वन विभाग की तैनाती पर बारीक नजर डाली।
सुरक्षा उपायों पर उन्होंने संतोष तो जताया, लेकिन स्पष्ट कहा कि “लोगों की जान से बड़ा कुछ नहीं, सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।” डीएम देर रात तक खुद टीम का नेतृत्व करते रहे, जबकि आमतौर पर शीतकाल में इस समय लोग घरों में खुराटे भरते है। सुबह खबर फैली — “ऐसा जिलाधिकारी पहली बार देखा जिसे अपनी नहीं, जनता की जान की चिंता है” सुबह जब ग्रामीणों को पता चला कि जिलाधिकारी रात भर गुलदार प्रभावित क्षेत्र में गश्त करते रहे, तो हर किसी की ज़ुबान पर एक ही बात थी “बाप रे बाप! ऐसा जिलाधिकारी भी आता है जिसे अपनी नहीं, जनता की जान की फिक्र होती है।” तीस साल से वन विभाग में सेवा दे रहे कर्मचारी भी हैरान हुए।
उन्होंने बताया कि आज तक उन्होंने किसी डीएम को रात में इस तरह गश्त करते नहीं देखा।
डीएम मनीष कुमार के इस कदम ने न केवल ग्रामीणों को भरोसा दिया, बल्कि जिले के सभी अधिकारियों तक यह साफ संदेश पहुंचाया “हम यहां जनता की सुरक्षा के लिए हैं, सुविधाओं का लाभ लेने के लिए नहीं।” ज्ञात हो कि जिलाधिकारी इससे पहले भी रात 12 बजे स्वाला डेंजर जोन में मजदूरों के बीच जाकर कार्यस्थलों का निरीक्षण करते रहे हैं, जिससे मजदूरों में अनुशासन और कार्यप्रणाली में उल्लेखनीय सुधार आया है। एसडीओ वन सुनील कुमार, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता हितेश, डीएसटीओ डीके तिवारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी जसवंत सिंह खड़ायत। इन अधिकारियों ने भी स्वीकार किया कि यह उनके लिए पहली बार था जब वे स्वयं जिलाधिकारी के साथ रात में गुलदार प्रभावित क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर रहे थे।




