
मोहित शर्मा
सतीकुंड पुनरोद्धार परियोजना को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता, हरिद्वार के प्रथम जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व मेला प्राधिकरण उपाध्यक्ष एवं श्रीगंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने परियोजना की लागत, ठेका प्रक्रिया और कार्यदायी संस्था के चयन पर गंभीर सवाल उठाते हुए सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस विषय पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की अपील भी की।
प्रेसवार्ता में अशोक त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि जिस कार्य की अनुमानित लागत करीब पांच करोड़ रुपये होनी चाहिए थी, उसे 61 करोड़ रुपये में स्वीकृत कर अहमदाबाद की एक कंपनी को सौंपा गया। उनके अनुसार परियोजना की डीपीआर यूयूआईडीसी ने तैयार की, जबकि कार्यदायी संस्था एनबीसीसी को बनाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि उत्तराखंड में इस कार्य को करने में सक्षम एजेंसियों की उपलब्धता के बावजूद बाहरी कंपनी को जिम्मेदारी क्यों दी गई।
उन्होंने कहा कि सतीकुंड हरिद्वार का प्राचीन एवं धार्मिक महत्व का तीर्थस्थल है, जहां कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं। उनका कहना था कि तीर्थ का संरक्षण और पुनरोद्धार आवश्यक है, लेकिन इसके नाम पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं।
त्रिपाठी ने कहा कि वह पिछले पांच दशकों से भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं, लेकिन अब पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की बात रखने के लिए कोई प्रभावी मंच नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री से कई बार मिलने का प्रयास किया, लेकिन समय नहीं मिल सका। इसी कारण उन्हें अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखनी पड़ रही है।
उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि हरिद्वार को राज्य में शामिल कराने के लिए उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनका आरोप था कि जिस उत्तराखंड की परिकल्पना की गई थी, वर्तमान परिस्थितियां उससे अलग दिखाई देती हैं और हरिद्वार की लगातार उपेक्षा हो रही है।
मेला अधिकारी पर परोक्ष धमकी का आरोप
प्रेसवार्ता के दौरान अशोक त्रिपाठी ने मेला अधिकारी सोनिका पर बातचीत के दौरान परोक्ष रूप से धमकी देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें डराने या गुमराह करने का प्रयास सफल नहीं होगा और वह अपने सार्वजनिक जीवन में अनेक आंदोलनों का सामना कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रकरण को लेकर 22 जुलाई को आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही सरकार से परियोजना की लागत, टेंडर प्रक्रिया और संबंधित सभी पहलुओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई।यदि चाहें, इसे और अधिक खोजी (इन्वेस्टिगेटिव) या पूरी तरह संतुलित (सरकार का पक्ष जोड़कर) अखबारी शैली में भी तैयार किया जा सकता है।




