
चम्पावत। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य की नई पीढ़ी के साथ सीधे संवाद कर भविष्य के उत्तराखंड की रूपरेखा पर मंथन करेंगे। युवा विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से “मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन” कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा देहरादून से वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा।
कैसा हो अपना उत्तराखंड?’ पर नई पीढ़ी देगी अगले पांच वर्षों के विकास का विजन
इस अभिनव पहल के तहत प्रदेश के 2,800 से अधिक विद्यालयों के तीन लाख से ज्यादा कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से मुख्यमंत्री के साथ अपने विचार और सुझाव साझा करेंगे। सरकार के अनुसार, यह देश में किसी मुख्यमंत्री द्वारा विद्यार्थियों के साथ भविष्य के राज्य के विकास को लेकर की जा रही एक अभिनव पहल है।
विद्यार्थी बताएंगे—कैसा हो अपना उत्तराखंड?
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों से हिंदी अथवा अंग्रेजी में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इनमें पर्यटन विकास, रोजगार के अवसर, वन एवं पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक शिक्षा, राज्य के विकास में महिलाओं की भूमिका, सड़क एवं कनेक्टिविटी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा तकनीकी विकास प्रमुख हैं।
विद्यार्थी अपने विद्यालयों के माध्यम से ऑनलाइन पोर्टल cmvidhyarthimanthan.com पर अपनी प्रविष्टियां अपलोड कर सकेंगे। प्रविष्टियां जमा करने की अंतिम तिथि 24 अगस्त निर्धारित की गई है। प्रविष्टि सफलतापूर्वक जमा करने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को डिजिटल प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा।
150 श्रेष्ठ सुझावों पर मुख्यमंत्री करेंगे मंथन
प्राप्त प्रविष्टियों में से लगभग 150 उत्कृष्ट सुझावों का चयन विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 16 सितंबर को आमने-सामने संवाद करेंगे और उनके विचारों एवं सुझावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
इस विशेष मंथन सत्र में संबंधित विभागों के सचिव भी मौजूद रहेंगे। विद्यार्थियों से प्राप्त उपयोगी सुझावों को राज्य की नीति निर्माण एवं विकास योजनाओं में शामिल किए जाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद जन्मी यह नई पीढ़ी आने वाले वर्षों में प्रदेश की विकास यात्रा की महत्वपूर्ण भागीदार बनेगी। “मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन” के जरिए युवाओं की सोच, आकांक्षाओं और सुझावों को विकास की नीतियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।






