
शिमला। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने आज रोहड़ू के चंद्राहन रंगमंच के कलाकारों को लोक भवन में चाय पर आमंत्रित किया और उनकी शानदार नाट्य प्रस्तुतियों के लिए सम्मानित किया। इस अवसर पर कलाकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत भी हुई, जिसमें हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, रंगमंच और नाट्य परंपराओं पर चर्चा की गई।
लोक भवन में कलाकारों के साथ संवाद, हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति और नाट्य परंपरा को सराहा
चंद्राहन रंगमंच मंडली के लिए यह अवसर भावुक और यादगार रहा। राज्यपाल ने कलाकारों के साथ बैठकर उनके अनुभवों को सुना और उनकी सांस्कृतिक गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि रंगमंच समाज को जागरूक करने और स्थानीय संस्कृति को संरक्षित रखने का प्रभावी माध्यम है।
12 अक्टूबर को शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में वरिष्ठ साहित्यकार एवं रंगकर्मी एस. आर. रत्नोर द्वारा निर्देशित नाटक ‘मधुशाला’ की प्रस्तुति सहित कलाकारों की अन्य गतिविधियों ने दर्शकों के बीच अपनी विशेष पहचान बनाई है। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवादों से दर्शकों को प्रभावित किया।
कलाकारों के साथ संवाद के दौरान राज्यपाल ने रंगमंच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज की वास्तविकताओं को सामने लाने और लोगों में संवेदनशीलता विकसित करने का माध्यम भी है। उन्होंने कलाकारों के समर्पण, मेहनत और सांस्कृतिक योगदान की प्रशंसा की।
राज्यपाल ने इस अवसर पर कलाकारों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में रंगमंच की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे प्रयास प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में सहायक हैं।
इसके उपरांत कलाकारों ने ऐतिहासिक लोक भवन का भ्रमण भी किया। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज भी उपस्थित रहे।




