
पुलिस अधीक्षक अजय गणपति बोले: “डिमांड खत्म होगी तो नशा अपने आप खत्म हो जाएगा”।
सेवा संकल्प धारिणी की ट्रस्टी गीता धामी ने यहां अपने प्रवास के दौरान युवाओं, महिलाओं और समाज के विभिन्न वर्गों से सीधा संवाद स्थापित कर नशा–मुक्त चम्पावत के लिए व्यापक सामाजिक जागरण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “यदि एक युवा दूसरे का जीवन नशे की बर्बादी से बचा लेता है, तो उससे बड़ा सामाजिक हित करने वाला कोई नहीं हो सकता।” पीजी कॉलेज में आयोजित “युवा संवाद” कार्यक्रम में गीता धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से प्रगति कर रहा है, और ऐसे समय में उत्तराखंड को भी विकास की पहली पंक्ति में लाने की जिम्मेदारी हर नागरिक की है।
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि “आपमें गंगा जैसी शक्ति है—जो पहाड़ों से निकलकर हर बाधा को पार करते हुए अपना मार्ग स्वयं बनाती है। बस अपनी शक्ति को पहचानिए और अपने जीवन को ऊँचाई पर ले जाइए।”उन्होंने कहा कि पहाड़ के लोगों ने कठिन परिस्थितियों में जीवन जीते हुए भी हर क्षेत्र में अपना परचम लहराया है। लेकिन आज नशे का बढ़ता दुष्प्रभाव परिवारों की खुशियों को ‘कपूर’ की तरह उड़ा रहा है। इसलिए नशे के सप्लायरों की पहचान कर समाज को जागरूक करना हर युवा की जिम्मेदारी है।
गीता धामी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मॉडल चम्पावत बनाने के संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ चल रहे विकास कार्य सीधे लोगों के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए हैं।

उन्होंने बताया कि सेवा संकल्प धारिणी द्वारा आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविरों का उद्देश्य है—“स्वस्थ नागरिक, मजबूत समाज और नशा मुक्त भविष्य।” कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने युवाओं को नशे के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चम्पावत को प्रदेश में दूसरा सबसे मजबूत नशा–रोधी मॉडल जिला बनाने में जनता और युवाओं के सहयोग की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने पिछले महीनों में करीब 15 करोड़ रुपये मूल्य के नशे का कारोबार पकड़ा है, जो बड़ी सफलता है, लेकिन “यदि समाज से नशे की डिमांड कम हो जाए, तो हम इसे बहुत तेजी से पूरी तरह खत्म कर सकते हैं।”
उन्होंने स्पष्ट कहा कि कुछ लोग अपने निजी लाभ के लिए युवाओं का भविष्य तबाह करने में लगे हैं। उनकी पहचान करने और समाज के सामने लाने का कार्य सबसे प्रभावी रूप से युवा ही कर सकते हैं। एसपी ने कहा कि वे स्वयं को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें ऐसे शांत, अनुशासित और दृढ़ इच्छाशक्ति वाले क्षेत्र में सेवा का अवसर मिला है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि राष्ट्र सुरक्षा और समाज निर्माण में ‘बिना वर्दी के पुलिसकर्मी’ बनकर आगे आएं, क्योंकि जितनी देरी होगी, यह सामाजिक बीमारी उतनी गहरी होती जाएगी। कार्यक्रम में युवाओं द्वारा विभिन्न विषयों पर प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। नशा–रोधी जागरूकता में सक्रिय भूमिका निभाने वाले शिक्षक सामाश्रवा आर्य एवं जनक चंद को मंच पर सम्मानित किया गया।





