
वाराणसी/ गोमती नदी के तट पर स्थित महाभारतकालीन ऐतिहासिक शक्तिपीठ अब अपनी वास्तविक पहचान के साथ विश्व पटल पर उभर रहा है। पीठाधीश्वर पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 रतन वशिष्ठ जी महाराज के प्रयासों से इस धाम का शुद्ध नामकरण ‘श्री वनशक्ति देवी धाम’ कर दिया गया है। वर्षों से लोग इस स्थान को ‘वनस्पति’ या ‘वनसत्ती’ जैसे नामों से पुकारते थे, लेकिन महाराज जी ने शास्त्रों और इतिहास के आधार पर इसे ‘श्री वनशक्ति देवी धाम’ के रूप में प्रतिष्ठित किया है, जो अब मंदिर के मुख्य द्वार पर स्वर्ण अक्षरों में चमक रहा है।
आज 3 जनवरी को मंदिर परिसर में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान पूज्य महाराज जी ने इस स्थान की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह मंदिर पांडवों के अज्ञातवास के दौरान माता द्रौपदी द्वारा स्थापित किया गया था। इस धाम की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ एक ही शिला पर विद्यमान 29 शिवलिंग हैं, जो गोमती तट पर एक अभूतपूर्व दृश्य प्रस्तुत करते हैं। महाराज जी ने आह्वान किया कि इस ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहर के जीर्णोद्धार के लिए सरकार या कोई सनातनी योद्धा आगे आए, जिसमें ‘ऋषि सनातन संघ’ पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।
क्षेत्रवासियों का मानना है कि जब से महाराज जी ने यहाँ की कमान संभाली है, मंदिर की भव्यता और रौनक में चार चाँद लग गए हैं। अभी हाल ही में 26 दिसंबर से 1 जनवरी तक यहाँ दिव्य महामृत्युंजय महायज्ञ का आयोजन हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय कर दिया। इससे पहले अक्टूबर में शिव महापुराण की कथा ने भी हजारों श्रद्धालुओं को निहाल किया था। वशिष्ठ गोत्र के महाराज जी के आगमन से स्थानीय रघुवंशी क्षत्रियों और ब्राह्मणों को अपने गुरु का सानिध्य प्राप्त हुआ है, जिससे यहाँ मुंडन और विवाह जैसे संस्कारों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
आज की वार्ता के दौरान भदोही जिले के वरिष्ठ समाजसेवी व नेता पप्पू तिवारी, आईबीसी 24 नेशनल न्यूज के विशेष संवाददाता श्री अभिषेक सिंह, सनातनी योद्धा गौरव मिश्र सहित अनिल चौबे, धीरज चौबे, नीलेश तिवारी, दीपक तिवारी और अनुराग सिंह जैसे कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। महाराज जी ने बताया कि आने वाले समय में यहाँ और भी कई बड़े धार्मिक आयोजन किए जाएंगे, जिससे इस प्राचीन शक्तिपीठ की कीर्ति पूरे देश में फैलेगी।








