
ज्ञात सूत्रों के अनुसार समस्त डी.ए.वी. संस्थाओं, विद्यालयों में वेद प्रचार सप्ताह के अंतर्गत श्रावणी मास में पुरानी वैदिक परंपरा के अनुसार जानी-पहचानी पहल होती है। ‘वेदों की ओर लौट चलो’ के निमित्त आर्य समाज की कल्पना करते हुए हम सभी इस दिशा में सार्थक प्रयास करते हैं। वेद प्रचार सप्ताह सात दिनों तक चलने वाला एक विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन है। इसे मुख्य रूप से आर्य समाज और डी.ए.वी. संस्थाओं द्वारा वेदों के ज्ञान, भारतीय संस्कृति, देश-प्रेम और मानवीय मूल्यों यथा मानवता, प्रेम, दया, करुणा, त्याग, सहयोग व सम्यक् कार्यों में सबकी बराबर सहभागिता, सबका साथ-सबका विकास के संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के लिए श्रावणी पर्व के आसपास मनाया जाता है।
विद्यार्थियों को वेदों से प्रेरणा लेकर श्रेष्ठ चरित्र निर्माण करने तथा भारतीय संस्कृति एवं प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित किया जाता है। हम भूले नहीं, वेदों के ज्ञान में ही जीवन का प्रकाश निहित है। सच कहें तो यह किसी संस्था विशेष का नहीं, आम जन का उत्सव होना चाहिए, जिससे व्यक्ति, परिवार, समाज, देश-परदेश की सर्वांगीण उन्नति होगी।


मुख्य गतिविधियों में यज्ञ और हवन – शुद्धि और सकारात्मकता के लिए सामूहिक यज्ञ किए जाते हैं। प्रवचन के माध्यम से वेदों के सार्वभौमिक संदेश, उसके महत्त्व और ज्ञान पर चर्चा होती है। शैक्षणिक कार्यक्रम की यदि बात करें तो स्कूलों में बच्चों के लिए भाषण, पेंटिंग, निबंध और वैदिक संस्कृति से जुड़ी प्रतियोगिताएँ होती हैं। अनेकता में एकता, भारतीय संस्कृति के मूल उद्देश्य को समझना-समझाना मुख्य लक्ष्य होता है।
इसी वैदिक परंपरा के संरक्षण की दिशा में जिला नालंदा मुख्यालय, बिहार शरीफ़ स्थित एस.पी. आर्य डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल में वेद प्रचार सप्ताह का शुभारंभ वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती अंशिमा सिंह ने शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं के साथ दीप प्रज्वलित कर इस कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके पश्चात गायत्री मंत्र का सामूहिक उच्चारण एवं लघु हवन आयोजित हुआ।
प्रधानाचार्या ने हवन में आहुतियाँ अर्पित कर सभी के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। शिक्षकों, विद्यार्थियों और अन्य सभी ने भी श्रद्धापूर्वक हवन में सहभागिता की। इस अवसर पर विद्यार्थियों को वेदों के महत्त्व, नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सदाचार एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। यह आयोजन 22 से 27 अगस्त 2026 तक सतत चला, जिसमें वैदिक मंत्र एवं भजन पाठ, प्रश्नोत्तरी, वृक्षारोपण, भाषण, श्लोक उच्चारण, पोस्टर तथा स्लोगन लेखन जैसी गतिविधियाँ आयोजित की गईं।
प्रधानाचार्या ने विद्यार्थियों को वेदों से प्रेरणा लेकर श्रेष्ठ चरित्र निर्माण करने तथा भारतीय संस्कृति एवं प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. सुनीता रंजिता सीमा




