
जो टूटकर भी न बिखरे वो दिल बनाए बैठे हैं
हम अपनी हार को भी हौसला बनाए बैठे हैं
उम्र भर मोहब्बत का भरम रखने के लिए
हम उसकी याद को दिल में बसाए बैठे हैं
मुझको समंदरों ने डराया बहुत मगर फिर भी
हम अपनी आँखों में कई साहिल सजाए बैठे हैं
वो ज़माने की निगाहों में बड़े होंगे मगर
हम भी ख़ुद्दारी का परचम लहराए बैठे हैं
किसी ने पूछा नहीं कभी हाल-ए-दिल हमारा
हम अपने दिल में कई ज़ख़्म छुपाए बैठे हैं
सुल्तान ए. गहलोत
कवि एवं अध्यापक
पूर्व छात्र, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी अलीगढ़, (उ. प्र.)








