
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पार्टी संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय पदाधिकारियों एवं विभिन्न प्रकोष्ठों में नई जिम्मेदारियों की घोषणा की है। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार नई नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।
जारी सूची में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही उत्तराखंड से श्री अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। संगठन में उत्तराखंड को मिली इन जिम्मेदारियों को राजनीतिक एवं संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।






राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की सूची में राजस्थान की वसुंधरा राजे सिंधिया, तीरथ सिंह रावत (उत्तराखंड), राम माधव (दिल्ली), बैजयंत जय पांडा (ओडिशा), डी. पुरंदेश्वरी (आंध्र प्रदेश), रेखा वर्मा (उत्तर प्रदेश), वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी (गुजरात), डॉ. भारती प्रवीण पवार (महाराष्ट्र), सरदार मनजीत सिंह बादल (पंजाब), लाल सिंह आर्य (मध्य प्रदेश), प्रो. एम. नागराज (कर्नाटक), प्रो. तारिक मंसूर (उत्तर प्रदेश) और डॉ. मधुचंद कर (पश्चिम बंगाल) शामिल हैं।
राष्ट्रीय महामंत्री पद पर भी नई नियुक्तियां
पार्टी ने विनोद तावड़े, सुनील बंसल, बिप्लब कुमार देब, स्मृति ईरानी, डॉ. सतीश पुनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी है। वहीं पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष तथा राजेश मंगल को राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
विभिन्न मोर्चों और मीडिया टीम में भी बदलाव
भाजपा ने युवा, महिला, ओबीसी, किसान, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक मोर्चों के लिए भी अध्यक्ष नियुक्त किए हैं। इनमें युवा मोर्चा की जिम्मेदारी डॉ. हेमांग जोशी, महिला मोर्चा की जिम्मेदारी श्रीमती रूप कुमारी चौधरी, ओबीसी मोर्चा की जिम्मेदारी अमरपाल मौर्य और किसान मोर्चा की जिम्मेदारी बंसीलाल गुर्जर को दी गई है।
मीडिया संयोजक के रूप में अनिल बलूनी के साथ मीडिया सह-संयोजक के तौर पर आशीष उपाध्याय, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को जिम्मेदारी दी गई है। सोशल मीडिया संयोजक दीपक म्हस्के होंगे, जबकि सोशल मीडिया सह-संयोजक के रूप में प्राप्ति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव को जिम्मेदारी मिली है।
भाजपा के इस व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन को आगामी राजनीतिक गतिविधियों और पार्टी के संगठन विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







