
प्रबुद्ध भारत के संपादक स्वामी दिव्य कृपानंद पर ऐसे पुष्प वर्षा की गई जैसे स्वामी विवेकानंद जी के शिकागों से लौटने के बाद उनकी की गई थी।
लोहाघाट। जिले के सबसे बड़े स्वामी विवेकानंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में लंबे अंतराल के बाद स्वामी विवेकानंद जी की 164वीं जयंती के अवसर पर भव्य एवं विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर विवेकानंद के विचारों, आध्यात्मिक राष्ट्रवाद और युवाशक्ति के संकल्प से आलोकित हो उठा।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक पत्रिका “प्रबुद्ध भारत” के विद्वान संपादक स्वामी दिव्य कृपानंद जी महाराज ने स्वामी विवेकानंद को “केवल 39 वर्षों में युगों का प्रकाश देने वाला महामानव” बताते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद और श्रीरामकृष्ण परमहंस का मिलन विश्व इतिहास की ऐसी आध्यात्मिक घटना थी, जिसने भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को नई चेतना दी।
उन्होंने कहा कि जब तक स्वामी जी के आध्यात्मिक राष्ट्रवाद के विचारों को बार-बार दोहराया जाएगा, तब तक मानवता, मानवीय मूल्य और राष्ट्रीय चरित्र जीवंत बने रहेंगे। स्वामी दिव्य कृपानंद ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद की अमृतवाणी का प्रत्येक शब्द युवाओं को ओजस्वी, तेजस्वी और बलशाली बनाता है तथा उनमें राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण पैदा करता है। उन्होंने कार्यक्रम के संयोजक सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रकाश लखेड़ा एवं समस्त महाविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि आज जो वैचारिक दीप जलाया गया है, वह पूरे उत्तराखंड के महाविद्यालयों को आलोकित करता रहेगा। साथ ही उन्होंने महाविद्यालय में विवेकानंद स्टडी सर्किल की स्थापना कर वर्षभर ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं की “ऊर्जा-चेतना” को जीवंत बनाए रखने पर विशेष जोर दिया और डॉ. लखेड़ा के प्रयासों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।

इससे पूर्व संपादक स्वामी जी पर ऐसे पुष्प वर्षा की गई जैसे शिकागों से लौटने के बाद स्वामी विवेकानंद जी पर की गई थी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सिविल जज एवं विधिक साक्षरता समिति के सचिव भवदीप सिंह राउते ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार मनुष्य के भीतर आत्मानुशासन, राष्ट्रीय चरित्र और परोपकार की भावना को उसी प्रकार जाग्रत करते हैं जैसे बिना बुलाए नदियां समुद्र में समाहित हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि महान विचार मनुष्य को स्वतः महानता की ओर खींच लेते हैं। मायावती आश्रम में स्वामी विवेकानंद के अल्प प्रवास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उसी प्रवास ने इस क्षेत्र की प्रकृति, संस्कृति और सेवा-भाव को नई दिशा दी, जिससे आज विश्वभर के लोग यहां आध्यात्मिक शांति की खोज में आते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद जी के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर डॉ. प्रकाश लखेड़ा एवं डॉ. रेखा मौनी द्वारा लिखित पुस्तक “स्वामी विवेकानंद और उनका राष्ट्रवादी दर्शन” का विमोचन किया गया तथा युवाओं को स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाएं भेंट की गईं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. उमाकांन्डपाल ने किया, जबकि प्राचार्य लता कैड़ा ने मुख्य अतिथि सहित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम ने लोहाघाट के शैक्षणिक परिवेश में विवेकानंद के विचारों को नई ऊर्जा और नई दिशा देने का कार्य इस अवसर पर डॉ एमसी त्रिपाठी, डॉ बीपी ओली, डॉ सुमन पांडे, शिक्षाविद् नाथूराम राय, नरेश राय, भैरव दत्त राय, चन्द्रा जोशी, छात्र संघ अध्यक्ष पदाधिकारी मौजूद थे।




