
देहरादून। उत्तराखण्ड मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के प्रशासनिक, औद्योगिक, शिक्षा, ऊर्जा और आधारभूत ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन फैसलों से जहां एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं, जनजाति कल्याण और औद्योगिक विकास को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर राज्य को शिक्षा और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान देने की दिशा में भी ठोस कदम बढ़ाए गए हैं।
कैबिनेट ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के ऐसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता/स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, जिन्होंने अपने मूल संवर्ग में न्यूनतम पांच वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी कर ली है, को पूरे सेवाकाल में एक बार आपसी समझ के आधार पर जनपद परिवर्तन की अनुमति देने को स्वीकृति दी। इससे कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को राहत मिली है।
राज्य में लघु, मध्यम और वृहद परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु कैबिनेट ने आपसी समझौते के आधार पर भू-स्वामियों से भूमि प्राप्त करने की नई प्रक्रिया को मंजूरी दी। इससे भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय घटेगा, मुकदमेबाजी कम होगी और जनहित की परियोजनाओं की लागत भी घटेगी।
उधमसिंहनगर जनपद स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान के रूप में विकसित करने के लिए सिडकुल को हस्तांतरित किए जाने संबंधी शासनादेश में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत औद्योगिक विकास विभाग एवं राजस्व विभाग की सहमति से समान प्रयोजन हेतु उप-पट्टा (सब-लीज) की अनुमति प्रदान की गई है।
जनजाति कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए देहरादून, चमोली, उधमसिंहनगर और पिथौरागढ़ जनपदों में चार जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों के पद सृजित किए जाने के लिए उत्तराखण्ड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2025 को भी कैबिनेट ने स्वीकृति दी।
कैबिनेट ने गैर-कृषिकारी उपयोग के लिए भू-जल निकास पर जल मूल्य/प्रभार की दरें तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया। उद्योगों, होटल, ग्रुप हाउसिंग, स्वीमिंग पूल, वाहन धुलाई केंद्र जैसे व्यावसायिक उपयोगों के लिए क्षेत्रवार दरें तय की गई हैं, साथ ही पंजीकरण शुल्क ₹5000 निर्धारित किया गया है।
राज्य को शिक्षा हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए देहरादून में “जी.आर.डी. उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय” नाम से निजी विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी गई। यह विश्वविद्यालय नवाचार, शोध, समग्र व्यक्तित्व विकास और रोजगार सृजन पर केंद्रित होगा।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तरकाशी की चिन्यालीसौड़ और चमोली की गौचर हवाई पट्टी को संयुक्त नागरिक एवं सैन्य उपयोग के लिए एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) के रूप में रक्षा मंत्रालय को लीज पर हस्तांतरित करने पर भी कैबिनेट ने सहमति दी।
इसके साथ ही राज्य में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए “उत्तराखण्ड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026” को मंजूरी दी गई। यह नीति जल विद्युत जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को प्रोत्साहित करेगी, जिससे रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलेगी।
कैबिनेट के ये फैसले उत्तराखण्ड के समग्र विकास, निवेश बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माने जा रहे





