
गीता धामी की अगुवाई में 900 से अधिक मरीजों का उपचार, व्हीलचेयर–चश्मे–स्टिक वितरित; विशेषज्ञ चिकित्सकों ने दी सेवाएं।
सेवा जब समर्पण और संवेदना से जुड़ जाती है, तो वह अपने आप में एक महायज्ञ बन जाती है। सुदूर सिटी गांव के राजकीय इंटर कॉलेज प्रांगण में बुधवार को ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जब सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन की अध्यक्ष गीता धामी की पहल पर आयोजित विशाल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य शिविर में सैकड़ों लोग अपनी पीड़ा लेकर आए और स्वस्थ उम्मीदों के साथ लौटे। सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज, स्वास्तिक हॉस्पिटल खटीमा सहित विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने यहाँ 900 से अधिक रोगियों का परीक्षण कर दवाइयाँ वितरित कीं।

शिविर में आयुर्वेद, होम्योपैथी, फिजिशियन, बाल रोग, स्त्री रोग, नेत्र रोग सहित कई अनुभवी चिकित्सकों ने बारीक परीक्षण कर मरीजों को उपचार उपलब्ध कराया। गीता धामी ने शिविर में पहुँचे दिव्यांगजनों, बुजुर्गों और जरूरतमंदों को अपने हाथों से व्हीलचेयर, चश्मे, स्टिक और अन्य सहायक उपकरण वितरित किए। बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने और महिलाओं से आत्मीयता के साथ संवाद करने की उनकी शैली ने लोगों को गहराई से प्रभावित किया।

महिलाओं ने कहा— “हर घर में गीता जैसी सेवाभावी बेटी होनी चाहिए।”
आयुर्वेदिक विभाग के डॉ. सुधाकर गंगवार और होम्योपैथिक विभाग के जिला अधिकारी डॉ. अशोक नगरकोटी ने भी बड़ी संख्या में रोगियों का परीक्षण कर परामर्श दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में इन चिकित्सा पद्धतियों की उपलब्धता कम होने के कारण लोगों ने इसका भरपूर लाभ उठाया। इधर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान स्वयं इस बात पर नजर रख रहे थे कि कोई भी रोगी बगैर परीक्षण व दवा के न जाए। यहां डॉ चौहान अपने पेशे की संवेदनशीलता का अच्छा परीचय देते दिखाई दिए।

उन्होंने दो दिव्यांगजनों का चयन कर आवश्यक प्रक्रिया भी शुरू कराई। अपने संक्षिप्त लेकिन प्रेरक संबोधन में गीता धामी ने कहा— “मुख्यमंत्री जी द्वारा मॉडल जिले की जो परिकल्पना दी गई है, उसी को और मजबूत करने के लिए सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन बना है। जिन चेहरे पर गरीबी और अभाव की वजह से इलाज न करा पाने की पीड़ा होती थी, उन्हीं चेहरों पर मुस्कान लौटाना ही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है।” उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि हर व्यक्ति जनसेवा को जीवन का मूल मंत्र बनाए और ऐसा कार्य करे जिससे “दूसरों के जीवन में अच्छे दिन आ सकें।”





