
आज हर इंसान चिंताओं से भरे मन से जीवन यापन कर रहा है। आज को पूरी तरह नहीं जी पाते क्योंकि कई तरह की चिंताएँ, ज़रूरतें और अधूरी ख्वाहिशें हैं जिन्हें पूरा करने की चिंता बनी रहती है, और कल के लिए आज को खो रहे हैं। कल क्या होगा यह नहीं जानते फिर भी मन में चिंता बनी रहती है। कभी-कभी चिंता दिल-दिमाग पर इस कदर हावी हो जाती है कि हम जीवित होकर भी मृतप्राय हो जाते हैं। यह जानते हुए भी कि चिंता से समस्याएँ और बढ़ती हैं, परिस्थिति ही ऐसी बन जाती है कि हम चिंताओं से मुक्त नहीं हो पाते। वक्त हर दर्द की दवा है, यह कहते तो हैं पर खुद को उस वक्त समझाना बहुत कठिन होता है जब हम किसी दुखद पल से गुजर रहे होते हैं। समझाना आसान है पर उस गमगीन पल से गुजरना कठिन है। विधि के विधान के आगे हम सभी को नतमस्तक होना ही पड़ता है, इसलिए खुद को हिम्मत देना ही सर्वश्रेष्ठ उपाय है।
जब तक ‘क्यों हुआ, कैसे हुआ, ऐसे नहीं होना था’ से निकल नहीं जाते, जीवन में आगे बढ़ना मुश्किल है, पर जिस दिन हम हादसों से टकराकर खुद को मजबूत बनाने की सोच लेते हैं उसी दिन जीने की चाह बढ़ जाती है। जब तक जीवन है मुसीबत के तूफान आते ही रहेंगे, इसलिए हमें रुकना नहीं, जीना है, अपना रास्ता खुद चुनना है और मंजिल तक पहुँचना है। लड़ना है अपने हक़ के लिए, सीखना है और बहुत कुछ सहन भी करना है। खुद की सकारात्मक सोच महत्वपूर्ण है क्योंकि लगातार दुख में रहने से शारीरिक-मानसिक परेशानी होती है। जिंदगी की राहें हर वक्त आसान नहीं होती, इसलिए जो सही हो वो काम करते रहो और अपनी मेहनत, ईमानदारी और नेक कर्म से अपना जीवन बेहतर बनाते रहिए।
यह समय ही चिंतनीय है। हमेशा हमें चिंतन करना चाहिए, पर चिंता करके कभी भी अपने आप को कष्ट मत पहुँचाइए। हमारी सकारात्मक सोच हमारे मन, मस्तिष्क और हमारे भीतर एक रोशनी बनाए रखती है। हमारा ध्यान मायने रखता है। आज में जीना है। हमारा मन हमें इसलिए पूरी तरह शांत नहीं होने देता क्योंकि हमारा मन कुछ न कुछ सोचता रहता है, पर इसे पूरी तरह से शांत रखा जा सकता है। आज में जीकर, बीते कल को एक किनारे रखकर, आने वाले कल की चिंता न करके, इसी क्षण को गले से लगाकर जीना है। खुश रहना है, अपने सही पथ पर बढ़ते जाना है और अपने कर्म करते जाना है। हमारा यह जीवन कर्मों से ही है।
*कविता:*
तेरे हँसने से
दूर हो जाएगी निराशा,
जो तेरे भीतर है।
जीवन में सदा
तू बस,
मुस्कुराते रहना।
दिल से हँसने पर हमारे मन के भीतर की सारी उदासी और निराशा यथाशीघ्र मिट जाती है। इसलिए, जीवन के प्रत्येक उतार-चढ़ाव में हमेशा मुस्कुराते हुए आगे बढ़ना चाहिए। जीवन की पूजा ही कर्म है। खुद पर हमेशा विश्वास रखकर निरंतर प्रयासरत रहना है। अपने पथ पर बढ़ते जाना है। आज हमारे पास जो भी है, उसी में हमारा सुख निहित है। उसी में खुश और संतुष्ट रहना है।


सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री, लेखिका, शिक्षिका
रिपोर्टर, उद्घोषिका, नवापारा-राजिम,
रायपुर (छत्तीसगढ़)





