
हरिद्वार। राष्ट्र की एकता एवं अखंडता, सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा मां गंगा की स्वच्छता के संकल्प के साथ हरिद्वार में भव्य दंडवत यात्रा का आयोजन किया जाएगा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक एवं मिश्री मठ के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महादेव महाराज ने बताया कि यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ-साथ गंगा संरक्षण, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक किया जाएगा।
30 अक्टूबर को दक्षेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक के बाद होगा यात्रा का शुभारंभ, 31 अक्टूबर को गंगा स्वच्छता अभियान और हरकी पैड़ी पर गंगा आरती का आयोजन
महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महादेव महाराज ने बताया कि दंडवत यात्रा का शुभारंभ 30 अक्टूबर को कनखल स्थित नया अखाड़ा उदासीन से किया जाएगा। इससे पहले भगवान दक्षेश्वर महादेव का विधि-विधान से रुद्राभिषेक किया जाएगा। भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर साधक सनातन धर्म की परंपराओं और मां गंगा की सेवा का संकल्प लेंगे। उन्होंने बताया कि यात्रा में लगभग 5,000 साधक दंडवत यात्रा में शामिल होंगे, जबकि करीब 1,000 स्वयंसेवक व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में सहयोग करेंगे। इसके अतिरिक्त हजारों श्रद्धालु और भक्तजन भी पदयात्रा के माध्यम से इसमें भाग लेंगे।
उन्होंने बताया कि 31 अक्टूबर को मां गंगा की सेवा के तहत विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इसमें संस्था के हजारों स्वयंसेवक गंगा घाटों की सफाई और गंगा संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश देंगे। शाम को हरकी पैड़ी पर मां गंगा की आरती कर सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
महामंडलेश्वर ने कहा कि मां गंगा भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक परंपरा की प्रमुख आधारशिला हैं। गंगा की निर्मलता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। गंगा में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए जनसहभागिता के माध्यम से लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से साधकों के साथ गंगा सेवा और स्वच्छता अभियान में योगदान देने का संकल्प लिया गया है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों की सार्थकता तभी है, जब उनसे समाज में सेवा, सद्भाव और जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो। दंडवत यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया जाएगा कि धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक संसाधनों और पवित्र नदियों की रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।
महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महादेव महाराज ने कहा कि कुंभ मेला भारतीय संस्कृति, संत परंपरा और आध्यात्मिक एकता का महत्वपूर्ण प्रतीक है। कुंभ को दिव्य एवं भव्य स्वरूप देने के लिए श्रद्धालुओं और समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता जरूरी है। दंडवत यात्रा के माध्यम से कुंभ मेले की महत्ता, मां गंगा के संरक्षण और सनातन संस्कृति के प्रति जनजागरण का संदेश दिया जाएगा।
मिश्री मठ के प्रबंधक डॉ. उमेश सचान ने बताया कि दंडवत यात्रा में मिश्री मठ के लगभग 1,000 स्वयंसेवक व्यवस्थाओं में सहयोग करेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा और आपातकालीन सहायता के लिए चार एंबुलेंस भी यात्रा के साथ रहेंगी, ताकि यात्रा के दौरान आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके और व्यवस्थाएं सुचारू बनी रहें।




