
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को ब्लैकमेल करने की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे “डिजिटल अरेस्ट” जैसा बताया है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा पर सीधा हमला हैं, फिर भी दुर्भाग्यवश इन्हें अब तक अपराध की श्रेणी में स्पष्ट रूप से नहीं रखा गया है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने टिप्पणी की कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग कर कुछ लोग दूसरों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित व्यक्ति खुद को असहाय और कैद जैसा महसूस करता है, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए चिंताजनक है।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि केंद्र और राज्य सरकारों को इस दिशा में सख्त कानून बनाने और मौजूदा कानूनी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि इस प्रकार के अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
- दिव्यांगों के लिए सुविधाएं:
सुप्रीम कोर्ट ने टैक्सी सेवाओं में दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को अधिक समावेशी बनाया जाना चाहिए। - राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप से इनकार:
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े एक मामले में कोर्ट ने धमकी संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला राजनीतिक प्रकृति का प्रतीत होता है। - आंध्र प्रदेश शराब नीति मामला:
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश शराब नीति घोटाले से जुड़े आरोपी रेड्डी को नियमित जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच जारी रहते हुए भी जमानत के आधारों को ध्यान में रखा गया है।






