
35 साल का लंबा इंतजार, हाथ पर गुदे नाम और ‘गूगल’ ने मिलाया अपनों से।
उत्तराखंड पुलिस की तत्परता: लावारिस शव की हुई पहचान, हरिद्वार में परिजनों ने किया अंतिम संस्कार
हरिद्वार। कहते हैं कि नियति अपनों को मिलाने का कोई न कोई रास्ता ढूंढ ही लेती है, फिर चाहे वह जीवित हों या मृत। हरिद्वार पुलिस ने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सूझबूझ के मेल से एक ऐसे व्यक्ति की शिनाख्त करने में सफलता हासिल की है, जो पिछले 35 वर्षों से अपने घर से लापता था। हाथ पर गुदे एक नाम और गूगल सर्च की मदद से पुलिस उस पते तक जा पहुँची, जहाँ तीन दशकों से एक परिवार अपने लाल की राह देख रहा था।
क्या था पूरा मामला बीती 5 मई 2026 को कोतवाली नगर क्षेत्र के बिरला रोड स्थित मंकर वाहिनी गंगामाता मंदिर के पास एक अज्ञात पुरुष का शव बरामद हुआ था। मृतक के पास न कोई दस्तावेज था और न ही कोई पहचान पत्र। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती शव की शिनाख्त करना था। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) का पालन करते हुए हरिद्वार पुलिस ने हार नहीं मानी।
हाथ पर गुदा नाम बना ‘तुरुप का इक्का’ जांच के दौरान पुलिस की नजर मृतक के हाथ पर गुदे “उदयवीर बहादुरगढ़” नाम पर पड़ी। कोतवाली नगर पुलिस ने इसी नाम को आधार बनाकर ‘गूगल’ की मदद ली, जिससे हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ क्षेत्र का सुराग मिला।
तीन दिन की कड़ी मशक्कत और व्हाट्सएप का सहारा
पुलिस टीम ने तत्काल हरियाणा के थाना लाइन पार (झज्जर) से संपर्क साधा और वहां के स्थानीय लोगों के नंबर जुटाए। शिनाख्त के लिए मृतक के फोटो व्हाट्सएप के माध्यम से साझा किए गए। तकनीक के इस सटीक इस्तेमाल ने रंग दिखाया और गांव वालों ने मृतक की पहचान उदयवीर (पुत्र रणवीर) के रूप में की। परिजनों ने बताया कि उदयवीर करीब 35 साल पहले घर से लापता हो गया था और तब से उसका कोई अता-पता नहीं था।
परिजनों ने नम आंखों से किया अंतिम विदाई सूचना मिलते ही मृतक के छोटे भाई संजय और अन्य परिजन शुक्रवार को हरिद्वार पहुंचे। मोर्चरी में अपने बड़े भाई का शव देख उनकी आंखें नम हो गईं। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया, जिसका खड़खड़ी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने रुंधे गले से उत्तराखंड पुलिस का आभार जताते हुए कहा— “अगर पुलिस इतनी मेहनत न करती, तो हमें अपने भाई के अंतिम दर्शन भी नसीब न होते।”
सराहनीय कार्य करने वाली पुलिस टीम:
इस कठिन गुत्थी को सुलझाने में मुख्य भूमिका निभाने वाली टीम में शामिल रहे:
अ.उ.नि. भरत सिंह
का. अमित भट्ट
का. परविन्द सिंह
का. विरेन्द्र सिंह
हरिद्वार पुलिस की इस मानवीय संवेदना और पेशेवर कार्यशैली की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।





