
देहरादून। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एएचआईडीएफ (Animal Husbandry Infrastructure Development Fund) योजना के तहत लोन स्वीकृत कराने के नाम पर रिश्वत मांगने वाले एक शातिर जालसाज को उत्तर प्रदेश के आगरा से गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर रहा था।
सीबीआई के अनुसार, उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर निवासी शकील अहमद, जो लालपुर गांव में मदीना पोल्ट्री फार्म संचालित करते हैं, ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उन्होंने सरकारी पोर्टल के माध्यम से एएचआईडीएफ योजना के अंतर्गत 22.50 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था। इसी दौरान खुद को विभागीय अधिकारी बताने वाले आरोपी प्रभु दयाल ने ऋण स्वीकृत कराने के बदले 2 प्रतिशत कमीशन (45 हजार रुपये) रिश्वत के रूप में मांगे।
शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 29 जून 2026 को ट्रैप कार्रवाई की। आरोपी ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 5,000 रुपये एक क्यूआर कोड के माध्यम से जमा कराने को कहा। जांच में पता चला कि यह क्यूआर कोड हरदोई (उत्तर प्रदेश) निवासी विकास त्रिपाठी के बैंक खाते से जुड़ा था। सीबीआई ने विकास त्रिपाठी से भी पूछताछ की।
जांच के दौरान खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी प्रभु दयाल, निवासी ग्राम छोटा पूथा बिसराना, आगरा (उत्तर प्रदेश), खुद को ‘ऋषि गुप्ता’ नाम से नई दिल्ली स्थित कृषि भवन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग का अधिकारी बताता था, जबकि वह वास्तव में एक निजी व्यक्ति है।
पूछताछ में विकास त्रिपाठी ने बताया कि वह कथित ऋषि गुप्ता से कभी मिला ही नहीं था और उसकी वास्तविक पहचान या ठिकाने से भी अनजान था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी दूसरों के बैंक खातों में यूपीआई के माध्यम से रकम मंगवाकर बाद में उसे अपने खातों में स्थानांतरित कर लेता था।
सीबीआई की जांच में यह भी पता चला कि आरोपी जिस मोबाइल नंबर का उपयोग कर रहा था, वह आगरा की एक महिला के नाम पर पंजीकृत था, जबकि महिला ने कभी वह सिम कार्ड लिया ही नहीं था। इससे स्पष्ट हुआ कि आरोपी फर्जी पहचान और फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहा था।
सीबीआई के अनुसार आरोपी लगातार अपनी लोकेशन और मोबाइल नंबर बदलकर जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश कर रहा था। वह दिल्ली, आगरा और जयपुर के बीच लगातार आवाजाही कर रहा था। डिजिटल सर्विलांस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर सीबीआई ने उसे आगरा स्थित उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी के घर की तलाशी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई। आरोपी को देहरादून की संबंधित अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। सीबीआई मामले की आगे की जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।




