
कर्म का तांडव अर्थात नव सृजन करना। कर्म से जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रक्रिया। खुद में जो बुराई है उसे दूर करने का संकल्प। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तैयार होना। शारीरिक, मानसिक, नैतिक और व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण प्रयास करना। अपने जीवन में पूर्ण समर्पण, त्याग, तपस्या, संयम को स्थापित करना। मानवीय गुणों को अपनाकर जीवन की विविध चुनौतियों के बीच मानसिक मनोबल को बनाए रखना और निर्भीक होकर जीवन की समस्याओं का सामना करना होता है।
जीवन को उत्कृष्ट बनाने के लिए जो जरूरी है, उस सही दिशा की ओर आगे ही बढ़ते रहना। कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना। रोग, शोक, संताप, भय की स्थिति से निकलना। संसार के सुख-शांति और समृद्धि के लिए कार्य करना। मानवता के उत्थान में सहयोग देना। आपसी भाईचारे के भाव को बढ़ाना। दुर्भाव को पूर्णतः नष्ट कर हृदय में सद्भाव भरना। जो मानसिक युद्ध हैं, जो हमें कमजोर करें और आगे बढ़ने से रोकें, ऐसे मानसिक तनाव का त्याग करना। आत्मविश्वास से कार्य करना। सक्रिय, कर्मठ और ईमानदार बनकर सद्कार्य से मन को पवित्र बनाना।
कर्म का तांडव हमें एक नई ऊर्जा प्रदान कर निष्क्रिय मन को सही कार्य के लिए प्रेरित करता है। जो काम हमने करने का सोचा है, उसे कभी अधूरा न छोड़ें। पूरे दिल से करें और जब तक पूर्ण न हो, चैन से न बैठें। कर्म के पथ पर रुकावटें आएंगी, पर उनसे घबराना नहीं है। पूरे मनोबल से सामना करना है। शिकवे-शिकायतें भूलकर कर्म के प्रति लगन रखिए। दिल में ऐसी आग प्रज्वलित कीजिए, जिसकी तेज से हर दुर्भाव मिट जाए। कर्म के पथ पर सुख-सुविधा, नींद-चैन सब त्यागकर संघर्ष से आगे बढ़ना जरूरी है। जब कर्म से महान लक्ष्य की प्राप्ति का जज्बा दिल में है, तो फल की चिंता छोड़कर बस अपने उद्देश्यपूर्ण कार्य में लीन हो जाइए। “क्या होगा?” यह कभी मत सोचिए। बस करना है और सफल होकर दिखाना है, यह ठान लीजिए।
अच्छे कर्म के लिए दृढ़ संकल्पित होना जरूरी है। सामान्य से विशेष करने और कर्म से अद्भुत परिणाम पाने के लिए कर्म में डूब जाना है। मेहनत से जीवन की हर कठिन परिस्थिति को बदला जा सकता है। सोचिए मत। जो चाहते हैं, उसे कर दिखाइए। कर्मवीर बनिए। कर्म का तांडव का अर्थ है – जो नामुमकिन है, उसे हम मुमकिन कर दिखाएं। हर पल अपने कर्मक्षेत्र में डटे रहिए। किसी हालत में पीछे न हटें, अंत तक प्रयास करें।
अगर जीवन को साकार करना है, तो बहाने बनाना छोड़ दीजिए। समय निकालिए और नेक इरादे से आगे बढ़िए। लड़िए बाधाओं से, हिम्मत बनाए रखिए। हालात का रोना बंद कीजिए, फोकस सिर्फ अपने कर्म में कीजिए। कर्म इतने मनोयोग से करिए कि रूठा हुआ भाग्य भी चमक उठे। कर्म का तांडव जब आप पूरे जोश-होश, ताकत-धैर्य और बिना रुके करते हैं, तो सफल होने से दुनिया की कोई भी शक्ति आपको नहीं रोक सकती। कोई भी काम करें, उसे ईमानदारी से पूर्ण कीजिए। जब भी कोई शुरुआत करें, अंत तक उसके लिए प्रयास करिए। जब पाना ही है कुछ, तो अधूरा मत छोड़िए। तभी आप कर्म से जीवन की खुशियों को पा सकते हैं।
कविता
”समय की गति अमोघ व बलवान है।
केवल कर्म की आराधना है।
परिस्थितियों के भीषण थपेड़े आएँ,
तब भी डिगना नहीं,
सत्कर्म के पथ पर बढ़ते रहना,
पीछे मुड़कर कभी न देखना।”
दार्शनिक चिंतन से जब हम देखते हैं, तो ज्ञात होता है कि कर्म का तांडव आत्मा और शरीर का जागरण तथा चेतना है। विचार हमारा बीज है, जीवन निरंतर बहने वाली एक नदी की भांति है और हम सब इसके कलाकार हैं जो इसकी व्याख्या करते हैं। व्यक्ति को दिनोंदिनथोड़ा-थोड़ा करके स्वयं को गढ़ना चाहिए और निरंतर बेहतर बनाते चलना चाहिए।

सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका
रिपोर्टर/उद्घोषिका
नवापारा-राजिम, रायपुर, (छत्तीसगढ़)







