
नवापारा-राजिम, छ.ग.। सरस्वती शिशु मंदिर नवापारा में भारत के महान रसायनज्ञ, उद्यमी एवं शिक्षक डॉ. प्रफुल्ल चंद्र राय की जयंती विज्ञान के विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों और अभूतपूर्व प्रयोगों के साथ समारोहपूर्वक मनाई गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष विनोद कुमार शर्मा, विद्यालय के व्यवस्थापक प्रफुल्ल दुबे, सह-सचिव कोमल साहू एवं प्राचार्य गौरीशंकर निर्मलकर ने माँ सरस्वती और डॉ. राय के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मुख्य वक्ता: नारायण पटेल
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नारायण पटेल, रायपुर जिला किसान प्रमुख रहे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शिक्षकगण विकसित करना इस कार्यक्रम का उद्देश्य है। विज्ञान क्रमबद्ध और व्यवस्थित ज्ञान है, जो उपयोग करके सीखा जाता है। उसे ही विज्ञान कहते हैं।
डॉ. प्रफुल्ल चंद्र राय के बारे में
अगस्त 1861 में रावली नामक गाँव में डॉ. प्रफुल्ल चंद्र राय का जन्म हुआ। वे असाधारण प्रतिभा के धनी थे। वे महान रसायनज्ञ थे, जिन्हें विश्व में आधुनिक रसायन का जनक कहा जाता है। उन्होंने कम उम्र में ही विज्ञान की आधारशिला रखी।
“रसायन विज्ञान सदा सत्य को प्रमाणित करता है”: प्रफुल्ल दुबे
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रफुल्ल दुबे ने अपने उद्बोधन में रसायन विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान की अनेक शाखाएँ हैं, जैसे भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान और राजनीति विज्ञान, परंतु रसायन विज्ञान का उपयोग मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में होता है। उन्होंने कहा कि रसायन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण आविष्कार हुए हैं और हमें अपने पूर्वजों के इन महान योगदानों के बारे में अवश्य जानना चाहिए। डॉ. प्रफुल्ल चंद्र राय की पूरी जीवनी हम सभी के लिए प्रेरणादायक और अनुसरणीय है। श्री दुबे ने जोर देकर कहा कि रसायन विज्ञान कभी मिथ्या नहीं कहता, बल्कि यह हमेशा सत्य की शिक्षा देता है और उसे प्रयोगों द्वारा प्रमाणित करता है।
प्राचार्य ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का किया आह्वान
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विद्यालय के प्राचार्य गौरीशंकर निर्मलकर ने अपने अध्यक्षीय भाषण में सभी छात्र-छात्राओं को डॉ. प्रफुल्ल चंद्र राय के पदचिह्नों पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने विद्यार्थियों से अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और देश के विकास में अपना योगदान देने का आह्वान किया।
वैज्ञानिक प्रयोगों एवं मॉडलों से किया अंधविश्वास का पर्दाफाश
इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा विज्ञान के कई चमत्कारी प्रयोग और मॉडल प्रदर्शित किए गए। निकिता साहू ने चमत्कार के पीछे के विज्ञान को समझाने हेतु प्रयोग किए। उन्होंने वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से समाज में फैले “भूत भगाने” जैसे अंधविश्वास व पाखंड का खंडन किया और बच्चों को इसके पीछे छिपे वास्तविक रसायन विज्ञान से अवगत कराया। इसी क्रम में कक्षा दसवीं के छात्र जयदेव मिश्रा ने विज्ञान मॉडल प्रस्तुत किए, जिनमें खेत में जंगली जानवर आने पर सायरन बजने की तकनीक, बिजली बचत के लिए रात में स्वतः जलने और दिन में बंद होने वाली स्ट्रीट लाइट तथा पर्यावरण बचाव के लिए धुआँ फिल्टर करने वाला सिस्टम शामिल था, जिससे धुआँ बाहर नहीं फैलेगा। अपूर्वा ध्रुव, मुस्कान साहू, टामिनी साहू और योगिता सिन्हा ने भी विज्ञान प्रयोगों में सक्रिय भागीदारी की। विज्ञान गणित परिषद के छात्र-छात्राओं का कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसके साथ ही अन्य छात्र-छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा दिखाई: गायत्री सोनकर ने पत्थर के टुकड़े में आग लगाने का विज्ञान प्रयोग प्रस्तुत किया। लावण्या साहू (कक्षा छठी) ने पानी से आग लगाने के वैज्ञानिक तरीके का प्रदर्शन किया। विज्ञान प्रयोग के माध्यम से सफेद कपड़े को पल भर में रंगीन कपड़े में बदलने का जादू भी दिखाया गया। अंकित साहू (कक्षा दसवीं) ने मानव शरीर पर प्रयोग करते हुए बिना काटे खून निकालने के पीछे के वैज्ञानिक रहस्य को उजागर किया। जयंती के उपलक्ष्य में छात्र-छात्राओं द्वारा विज्ञान पर आधारित आकर्षक रंगोली, मनमोहक चित्रकला और उत्कृष्ट निबंधों का भी बढ़िया प्रदर्शन किया गया। संचालन दीपक देवांगन ने किया। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन के साथ समारोह का समापन हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएँ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।






