
लखनऊ। बेसिक हेल्थ केयर प्रोवाइडर का मुद्दा आने वाले दिनों में न केवल लोकसभा या राज्यसभा में उठेगा बल्कि राष्ट्र विमर्श का भी स्थान ग्रहण करेगा।
उक्त घोषणा ऑल इंडिया बेसिक हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (जेपीसी) की नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राज्यसभा सदस्य बीडा मस्तान राव तथा लोकसभा सदस्य डगुमल्ला प्रसाद राव ने संयुक्त रूप से किया। बैठक की जानकारी देते हुए जेपीसी के वाइस चेयरमैन तथा इंडियन रूरल मेडिकोज सोसाइटी के अध्यक्ष डा. ओपी मिश्रा ने बताया कि बैठक में चिकित्सा मित्रों से जुड़े तमाम मुद्दों पर व्यापक विचार विमर्श तथा चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि अब इस मामले को जनता के दरबार में ले जाया जाएगा।
क्योंकि चिकित्सा मित्र अधिकतर ग्रामीण भारत के लोगों को ही प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराते हैं। डॉक्टर मिश्रा ने आगे बताया कि पूरे देश में लगभग 30-40 लाख ऐसे लोग चिकित्सा कार्य में लगे हैं। जिनके पास केवल अनुभव है कोई मान्य उपाधि नहीं है।दिल्ली के आंध्र भवन में आयोजित उक्त बैठक में उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, कर्नाटक के प्रतिनिधियों ने भाग लिया बैठक की अध्यक्षता तेलुगू देशम पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा जेपीसी के अध्यक्ष टीडी जनार्दन ने किया।
जबकि मुख्य वक्ता अध्यक्ष डा. के. जी. गोविंदा रेड्डी और डा. एन. एल. राहुल रहे। बैठक में सर्वसम्मति से अनुभव के आधार पर चिकित्सा कार्य कर रहे चिकित्सा मित्रों को एक समयबद्ध प्रशिक्षण देकर उन्हें प्राथमिक उपचार करने का अधिकार दिये जाने की मांगे स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से की गई। बैठक बताया गया कि जेपीसी का एक दस सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल मार्च के महीने में स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर ज्ञापन दे चुका है।







