
(कविता: विशेष हिन्दी दिवस)
भारत माता की शान,
वेद पुराण का ज्ञान।
वैज्ञानिकों का विज्ञान,
हम सबकी पहचान हिन्दी।
लोकतंत्र की बहती जान,
जन-जन का प्यारा अरमान।
गौरवशाली राष्ट्र-संस्कृति का,
परम् पूज्य अभिमान हिन्दी।
रिश्तों का सुखद आधार,
अक्षय शब्दों का भंडार।
हर अन्याय पर करारा वार,
न्याय का अनुपम सार हिन्दी।
कल्पना का सुन्दर तार,
रचना का अप्रतिम संसार।
मन की भावना का विस्तार,
सपने करती साकार हिन्दी।
नेह-प्रेम की मीठी आवाज़,
अखंड भारत का पावन साज़।
सद्भाव तथा समरसता का,
मस्तक पर सजता ताज हिन्दी।
कवियों की पावन आन,
साहित्य का बेजोड़ सम्मान।
भारत माँ का अमिट वरदान,
सर्वोपरि बनी रहे अपनी हिन्दी।

ममता साहू, कांकेर, (छ.ग.)
लेखिका, कवयित्री व शिक्षिका





