
देश में विकास की रफ्तार तेज हुई है, तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है और युवाओं के लिए अवसर बढ़े हैं, लेकिन इसके साथ मानसिक तनाव, बेचैनी और जीवन के प्रति निराशा भी गंभीर चुनौती बन रही है। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर MAAsterG ने आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में अध्यात्म और जीवन के ज्ञान को शामिल करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री और तकनीकी ज्ञान से युवा का संपूर्ण विकास नहीं हो सकता, उसे यह भी समझना होगा कि वह स्वयं कौन है और जीवन का उद्देश्य क्या है।
MAAsterG ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस की स्थापना का उद्देश्य दुनिया का ध्यान युवाओं की समस्याओं की ओर आकर्षित करना था। आज जरूरत इस बात की है कि युवाओं को बाहरी उपलब्धियों के साथ आंतरिक शांति का मार्ग भी दिखाया जाए। भारत की पहचान सदियों तक इसी आध्यात्मिक ज्ञान के कारण रही है। श्रीराम, श्रीकृष्ण, गौतम बुद्ध, महावीर, गुरु नानक देव, कबीर, मीराबाई और अन्य संतों ने मनुष्य को स्वयं को जानने और भीतर की शांति प्राप्त करने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि गीता, गुरु ग्रंथ साहिब, धम्मपद, उपनिषद और अन्य धार्मिक ग्रंथ केवल धार्मिक पुस्तकें नहीं, बल्कि जीवन को समझने का ज्ञान देते हैं। इस ज्ञान को स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों की शिक्षा से जोड़ने की जरूरत है।
MAAsterG के अनुसार, पिछले 16 वर्षों में किए गए प्रयासों के दौरान हजारों लोगों के साथ काम किया गया और तनाव व निराशा से जूझ रहे युवाओं को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने में मदद मिली। इसी उद्देश्य से ‘मिशन 800 करोड़’ शुरू किया गया है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर वे बाहरी सफलता के साथ अपने भीतर की शांति को भी प्राथमिकता दें। उनका कहना है कि भारत को फिर से विश्व गुरु बनना है तो तकनीकी और आर्थिक विकास के साथ आध्यात्मिक विकास को भी आगे बढ़ाना होगा।







