
जबलपुर (म.प्र.)। हिन्दी साहित्य की नवीन एवं लोकप्रिय विधा ‘पूर्णिका’ के जनक एडवोकेट डॉ. सलपनाथ यादव ‘प्रेम’ द्वारा प्रवर्तित इस विधा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर प्रतिष्ठा प्राप्त हो रही है। इसी क्रम में वरिष्ठ साहित्यकार रजनी कटारे ‘हेम’ द्वारा रचित “पूर्णिका सुगंध मंजरी” (पूर्णिका संग्रह) को मॉरीशस की प्रतिष्ठित संस्था हिन्दी प्रचारिणी सभा की लाइब्रेरी में सम्मानपूर्वक स्थान प्राप्त हुआ है।
यह पुस्तक मॉरीशस के वरिष्ठ पूर्णिकाकार एवं हिन्दी सेवी आदरणीय गौवर्धन सिंह फौदार ‘सच्चिदानंद’ के कर-कमलों द्वारा हिन्दी प्रचारिणी सभा, मॉरीशस की अध्यक्षा श्रीमती रोहिणी रामरूप को सादर भेंट की गई। पुस्तक के अध्ययन के उपरांत हिन्दी प्रचारिणी सभा की ओर से रजनी कटारे ‘हेम’ को प्रशस्ति-पत्र प्रेषित किया गया। अपने संदेश में संस्था ने पूर्णिका विधा के नियमों का सफल निर्वहन, पुस्तक की प्रभावशाली प्रस्तुति तथा समसामयिक सामाजिक विषयों पर सशक्त अभिव्यक्ति की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।
यह उपलब्धि न केवल पूर्णिकाचार्या रजनी कटारे ‘हेम’ के लिए, बल्कि हिन्दी साहित्य की नव-विधा ‘पूर्णिका’ के वैश्विक विस्तार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। मॉरीशस जैसे हिन्दी-प्रेमी देश की प्रतिष्ठित संस्था के पुस्तकालय में इस कृति का शामिल होना हिन्दी साहित्य के अंतरराष्ट्रीय प्रसार का सुखद संकेत है।
इस अवसर पर रजनी कटारे ‘हेम’ ने हिन्दी प्रचारिणी सभा, मॉरीशस की अध्यक्षा श्रीमती रोहिणी रामरूप, वरिष्ठ पूर्णिकाकार आदरणीय गौवर्धन सिंह फौदार तथा संस्था के समस्त पदाधिकारियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा व साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए उनका समर्पण विश्वभर के साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्रोत है। साथ ही उन्होंने पूर्णिका के जनक एडवोकेट डॉ. सलपनाथ यादव ‘प्रेम’ के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की, जिनके मार्गदर्शन व नव वैकल्पिक सृजनात्मक दृष्टि से पूर्णिका विधा आज देश-विदेश में निरंतर प्रतिष्ठित हो रही है।






